बिना किसी हथियार के अंग्रेजों को झुकाने वाला यह संत हर हिंदीभाषी के दिल में ‘बापू’ है – यानी एक अद्वितीय लीजेंड।


अमन का जन्म उत्तरांचल के एक छोटे से पहाड़ी गाँव में हुआ। गाँव की मिट्टी की महक, ठंडी हवाओं की सरसराहट और परंपराओं की मिठास ने उसे संवारा, पर गरीबी की कठोर हकीकत ने उसे जल्दी ही ज़िन्दगी की तमाम सीमाओं से रू-ब-रू कराया। उसके पिता एक साधारण शिक्षक थे और माँ खेतों में मेहनत करती थीं। पढ़ाई का बहुत शौक होने के बावजूद संसाधनों की कमी ने कई बार अमन के सपनों को झिंझोड़ दिया। पर उसकी निगाहें ऊँची थीं — उसे पता था कि शिक्षा ही उसकी दुनिया बदल सकती है।

खेल के मैदान में ‘ट्रू लीजेंड इन हिंदी’ सबसे ज्यादा चर्चित होता है: