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Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full -

पडिक्कमामि दुव्वासणं, पडिक्कमामि सव्व दोस।
पडिक्कमामि पावाणि, पडिक्कमामि सव्वसो।।

हिंदी:
मैं दुर्वासना (बुरी इच्छाओं) का प्रतिक्रमण करता हूँ, सब दोषों का प्रतिक्रमण करता हूँ, पापों का प्रतिक्रमण करता हूँ, और सब प्रकार से प्रतिक्रमण करता हूँ।


जैन धर्म के पवित्रतम तीर्थ, शत्रुंजय तीर्थ (पालीताणा) पर चढ़ाई करने वाला हर श्रद्धालु ‘चैत्यवंदन’ का पाठ करता है। लेकिन जो साधक ‘पाँच चैत्यवंदन’ (Panch Chaityavandan) की गहन साधना करता है, वह सिर्फ पहाड़ी पर नहीं चढ़ता, बल्कि आत्मा की सीढ़ियाँ चढ़ता है।

पाँचों चैत्यवंदन पूरी होने के बाद, श्रद्धालु उतरते समय भी उसी भाव से उतरता है। वह सोचता है- "अब मैं वही व्यक्ति नहीं रहा जो सुबह चढ़ा था। मैं हल्का हो गया हूँ।"

कहानी के अंत में एक सत्य है- पालीताना की पाँच चैत्यवंदन केवल प्रार्थना नहीं, यह जीवन जीने की कला है। यह हमें सिखाती है:

मूल पाठ:

णमो णमो णमो जिणाणं, जिणवर चरण कमल मणिरंजित माणं। उप्पन्न चउव्वीसं, अज्जभवि चउव्वीसं। आगामि चउव्वीसं, तच्च चउ दस साहुणं... (लघु रूप में) - णमो णमो अरिहंताणं भगवंताणं जिणाणं केवलिाणं सव्वदुक्ख प्रहाणयाणं।

हिंदी अर्थ:

मैं जिनेन्द्र भगवान को बार-बार नमस्कार करता हूँ, जिनके चरणकमलों में रत्न जटित (चरण चिह्न) मन को मोह लेते हैं। भूतकाल में हुए 24 तीर्थंकर, वर्तमान में विद्यमान 24 तीर्थंकर, भविष्य में होने वाले 24 तीर्थंकर तथा चौदह कुलकर – सभी को नमस्कार है।

पालिताना जैन मंदिर के समूह में हजारों मंदिर हैं, लेकिन मार्गदर्शक (मार्ग-दर्शक पुस्तिका या ग्रंथ) में विशेष रूप से पांच प्रमुख मंदिरों का वर्णन किया गया है। इन पांच मंदिरों में की जाने वाली वंदना को ही 'पांच चैत्यवंदन' कहा जाता है। यात्रीगण विशेष रूप से इन पांच स्थानों पर जाकर पूजन-अर्चना करते हैं।

मूल पाठ:

आउरियाए चाउरियाए, देउलियाए चिट्ठिआणं। छप्पि आसण पडिमाणं, णमो णमो वंदामि णिच्चं।

हिंदी अर्थ:

जो मंदिर में विराजमान हैं, जो आसन पर विराजमान हैं, जो खड़े हैं, चारों दिशाओं में स्थित हैं, अथवा छह प्रकार की प्रतिमाओं में स्थित हैं – उन सभी जिनेन्द्रों को मैं नित्य (प्रतिदिन) नमस्कार करता हूँ, वंदना करता हूँ।

णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्व साहूणं
एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो
मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं।

हिंदी अर्थ:
अरिहंतों को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, सब साधुओं को नमस्कार। यह पाँचों नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है और सब मंगलों में यह पहला मंगल है। palitana 5 chaityavandan in hindi full


मूल पाठ:

णमो सिद्धाणं, जे त्ति परं गयाणं, सिद्धि इक्कंठयाणं। वीयराग रूवाणं, अमय रस जीहालयाणं।

हिंदी अर्थ:

मैं सिद्ध परमात्माओं को नमस्कार करता हूँ, जो संसार से परे (सिद्धशिला) में निवास करते हैं। जिनकी सिद्धि एक साथ (क्षयोपशम से नहीं, पूर्ण क्षय से) हुई है, जो पूर्णतया वीतराग हैं तथा जिनकी आत्मा अमृत रस से पूर्ण है।